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14 जन॰ 2013

हमारे सेना प्रमुख

हमारे सेना प्रमुख का बयान "अगर पाक ने अपना रवैया नही बदला तो भारत आक्रामक कार्यवाही करेगा|"

हा हा हा,

ही ही ही,

हो हो हो|

ये मजाक अच्छा नही है सेना प्रमुख जी| जरा ये तो बताओ कि रोका किसने है, और साले किस माई के लाल में दम है जो भारतीय सेना को रोक ले?

हाँ, अगर आप ये दलील देना चाहते हो कि मंदमोहन की, प्रोणव की, आउल बाबा की, माइनो की इजाजत के बिना आप कुछ नही करोगे तो "थू" है आप पर|
या फिर आप ये कहो कि भारत ने आजतक किसी भी देश पर पहले हमला नही किया है और हम इस इतिहास को नही बदलेंगे तो आप की जानकारी के लिये बता दूं कि सिर्फ सेना लेकर मिसाइल, बम के साथ हमला नही किया जाता| हमला तो कई तरीको से, कई मोर्चो पर किया जाता है|

जैसे पोर्किस्तान कर रहा है --
१) आतंकवादी भेजकर|
२) भारत के साथ व्यापार करने की आड में अपने धन को बढाकर और अपने एजेंट भारत में भेजकर|
३) सीमा पर इस तरह की घटनाओं को अंजाम देकर, जिस पर भारत सरकार सिर्फ अपना विरोध दर्ज करा रही है और सेना कुछ नही कर रही है, बल्कि दुश्मन से प्रार्थना कर रही है कि हमारे सैनिको के सिर हमें वापस लौटा दो|
 इससे और कुछ नही होगा बल्कि भारतीय सैनिको का मनोबल गिरेगा कि हम देश के लिये जान तक दे देते है और हमारी लाशो पर राजनीति की जाती है|

जबकि सेना और भारत सरकार को चाहिए कि ऐसी किसी घटना के होते ही तुरंत हमला बोले -"शब्दो से नही बल्कि हथियारो से"| जैसा इजरायल ने फलिस्तीन के साथ किया, या फिर कथित चौधरी अमेरिका ने इराक और अफगानिस्तान के साथ किया|

अगर सरकार और सेना ने इसी तरह का रवैया अपनाए रखा तो वो दिन दूर नही जब पाक या चीन हम पर आक्रमण करेगा और हमारी सेना में फैला असंतोष हमारी हार का कारण बनेगा और इस देश के और ज्यादा टुकडे हो जायेंगे|

22 दिस॰ 2012

दिल्ली में हुआ बदलाव की क्रान्ति का आगाज

आज भारत के इतिहास में एक और पन्ना जुड गया है कि जिन ... को हम अपना प्रतिनिधी चुनकर अपने देश की बागडोर सोंपते है, वो जरूरत पडने पर हमारी ही बात नहीं सुनते है|

इस देश में जब भी कोई आंदोलन होता है, तो वो अहिंसापूर्वक ही शुरु होता है, लेकिन हमारे देश के महान ( कमीने ) जनप्रतिनिधी उसे एक हिंसापूर्ण आंदोलन में बदल देते है, अपनी इन ओछी हरकतो से |
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 और फिर मीडिया के सामने आ जाते है भौंकने के लिये कि हमारी प्रदर्शनकारियो से अपील है कि शंतिपूर्वक आंदोलन करें|
और कभी-कभी तो हद ही कर देते है यह कहकर कि हिंसा से कुछ प्राप्त नहीं होता, यह देश और हम गांधी जी के सिद्धांतो को मानने वाले है और हमें उनका अनुसरण करना चाहिए|
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 लेकिन आज जो कुछ भी हो रहा है, दिल्ली में उसने यह साबित कर दिया है कि लातो के भूत कभी बातो से नहीं मानते| जो उस देश की बेटी के साथ हुआ, अगर वो इन कमीनो की लडकी के साथ हौ जाता तो तुरंत कठोर कानून पारित करवा लेते, अध्यादेश जारी करके|
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FDI पर अध्यादेश जारी करके bill पास करवा सकते है तो लज्जाभंग के लिये कानून पारित करने के लिये अगले सत्र का इंतजार क्यों??????
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आज दिल्ली में एकत्र हुए लोग जिनमें ज्यादातर विद्यार्थी है, किसी राजनैतिक पार्टी से नहीं है, उन सभी को पैसा देकर या किसी व्यक्ति ने आव्हान कर नहीं बुलाया है, बल्कि वो सभी एकत्र हुए है, SMS, PHONE, और social networking के जरिए||
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और यही है भारत की वो असली जनता जिसे ये सफेद खादी धारण करने वाले और काले मन (दिल, दिमाग) वाले नेता भारत का भविष्य कहते है, और आज जब ये भविष्य अपने खुद के भविष्य के लिये उनसे जबाब मांगने और कठोर कानून की बात करने दिल्ली पहुंचा तो हवा टाइट हो गयी सभी. . . की||
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एक भी नेता नजर नही आया, कि चलो बात तो सुन ले कि क्या कहना चाहता है इस "भारत" का भविष्य?? आता भी कैसे, एक भी राजनैतिक दल ऐसा नहीं है जिसमें अपराधी ना हो, अपराध भी कैसे-कैसे (लज्जाभंग, कत्ल, गबन, घोटाला, बलपूर्वक दूसरों के जमीन-धन पर कब्जा)|
अब जब खुद की पार्टी में ही कालिख पुते लोग है तो जनता के सामने किस मुंह से आये??
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अब इस देश को जरूरत है, एक आमूलचूल परिवर्तन की| एक नये संविधान की, एक नये नायक की, एक नयी क्रान्ति की ||||

इतिहास गवाह है कि जब-जब भी किसी देश में एक बडा परिवर्तन आया है, उसके पीछे युवाओं का ही बडा योगदान रहा है|
बस अब और ज्यादा नहीं लिखुंगा, आज के लिये इतना ही ||

                                                                                             ___________ "एक भारतीय"